खुदा का आसरा
खुदा का आसरा
1 min
303
जब ख़ुदा का मुझे आसरा मिल गया
लोग कहने लगे जाने क्या मिल गया
बात दिल में छुपी भी समझ जाए जो
मीत ऐसा जहां से जुदा मिल गया
जिस डगर हम चले थे समर्पण लिए
बस वहीं पे वफ़ा का सिला मिल गया
जान लो फ़िर कभी वो उठा ही नहीं
गर समय से बशर को दगा मिल गया
सोचता था जिसे यह मुसाफ़िर कठिन
उस ग़ज़ल का हमें क़ाफ़िया मिल गया।
