धुंधली डगर
धुंधली डगर
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हर दवाई बेअसर है क्या करूँ!
आज धुंधली हर डगर है क्या करूँ!!
ज़ख्म जो हमको मिले हैं आपसे!
अब तलक बाकी कसर है क्या करूँ!!
बढ़ते जाना ही सदा हर पल मुझे!
ज़िंदगानी का सफर है क्या करूँ!!
सर पे मेरे हर समय धुन जो चढ़ी!
गीत ग़ज़लों का असर है क्या करूँ!!
कल तलक जो खेलता दौलत में था!
आज फिरता दर-बदर है क्या करूँ!!
बात दिल की है मुसाफ़िर बस यही!
वक्त होता मौतबर हैं क्या करूँ!!
