STORYMIRROR

धर्मेन्द्र अरोड़ा "मुसाफ़िर"

Others

3  

धर्मेन्द्र अरोड़ा "मुसाफ़िर"

Others

आंखें चुरा रहा है

आंखें चुरा रहा है

1 min
314


आँखें चुरा रहा है।

नींदे उड़ा रहा है।।


मीठी अदा से यारों।

सब को लुभा रहा है।।


रब की अजीब माया।

रहमत लुटा रहा है।।


गूंगा भी आज देखो।

बातें बना रहा है।।


तारीख से मुसाफिर।

करता वफा रहा है।।




Rate this content
Log in