STORYMIRROR

दयाल शरण

Others

2  

दयाल शरण

Others

मोहरे

मोहरे

1 min
819


किसी बहाने सही

हमे याद तो

किया कीजे

हासिये पे सही

किसी गिनती में

गिना कीजे


छोटे मोहरे हैं

मगर बड़े

काम के हैं बाबू

जब कभी

आपकी बारी हो

हमारा कत्ल

करवा दीजे


जिंदगी है

पता नहीं फिर

कभी मौका मिले

या ना मिले

आज हम ढाल हैं

कल रहें, ना रहें

जुबा को जुंबिशे

लबों पे मुस्कुराहट

रखा कीजे।


कहां पता था कि

बारिशें भिगोयेंगी कम,

बहाएंगी असबाबों को

ज्यादा,

हमारे हिस्से में

खानाबदोशी सही

आप अपना आशियां

जरा बचा लीजे।


Rate this content
Log in