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दयाल शरण

Others

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दयाल शरण

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मोहरे

मोहरे

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किसी बहाने सही

हमे याद तो

किया कीजे

हासिये पे सही

किसी गिनती में

गिना कीजे


छोटे मोहरे हैं

मगर बड़े

काम के हैं बाबू

जब कभी

आपकी बारी हो

हमारा कत्ल

करवा दीजे


जिंदगी है

पता नहीं फिर

कभी मौका मिले

या ना मिले

आज हम ढाल हैं

कल रहें, ना रहें

जुबा को जुंबिशे

लबों पे मुस्कुराहट

रखा कीजे।


कहां पता था कि

बारिशें भिगोयेंगी कम,

बहाएंगी असबाबों को

ज्यादा,

हमारे हिस्से में

खानाबदोशी सही

आप अपना आशियां

जरा बचा लीजे।


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