STORYMIRROR

माँ,मैं तुझ सी ही औरत कहलाती

माँ,मैं तुझ सी ही औरत कहलाती

1 min
480


माँ,मैं तुझ सी ही औरत कहलाती हूँ

पहले देखती थी तुझे अपनी चाहतें मारते हुए

अब मैं भी वही पदचिन्ह दोहराती हूँ

सब जब संतुष्ट सो जाते है

तो तुझ सी मैं भी बौराती हूँ

माँ,मैं तुझ सी ही औरत कहलाती हूँ

सोचती थी तूने कभी बगावत क्यूँ ना की

अपने स्त्रीत्व की हिफाज़त क्यूँ ना की

पर जो तुझे हम ना पाते

कैसे आज इंसान कहलाते

अपना निवाला भी हमें खिला के

तू संतुष्ट सो जाती थी

माँ,इतनी ममता देकर

तू भला क्या पाती थी

पर आज वही महसूस हुआ

जब मैं भी तुझ सी माँ बनी

तू जो कहा करती थी

वही कहानियाँ मैंने कही

गर्व है माँ,मैं तुझ सी ही औरत कहलाती हूँ

पहले तू मिसाल थी हमारी

अब मैं भी वही पदचिन्ह दोहराती हूँ।


Rate this content
Log in