लोग
लोग
1 min
265
लोग धरने देते है
वो नहीं सुधरने वाले
वो जानते है
मज़हब के मायने
समझते है मतलब की ज़बान
लरज़ते होंठों पर
उन्होंने
मौत का स्वाद
रख छोड़ा है
जिस सम्बन्ध में
फायदा है
कायदा जाए
भाड़ झौंकने
बस वहीं स्वार्थ का
एक रिश्ता अंत में
जोड़ा है
अन्याय को लाचारी
और साम्प्रदायिक भावना से
ओतप्रोत कर
देश के हित से
अपने हित को
ज़रा मोड़ा है
नाम देश के
बोलो ज़ोर लगाकर
ख़ामोशी से कर लो
अपनी हसरतों की
दुनियाँ मुट्ठी में
मूर्ख है या
मूर्ख बना रहे है
लोग
जानबूझकर क्यों
अपनी बर्बादी के
लावे को भड़का रहे है
लोग...
