कर्मों का बखान
कर्मों का बखान
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नहीं मानता कि अपने कर्मों का बखान किया जाये,
जब किसी को दिखता नहीं तो क्या बात किया जाये।
ऐसा नहीं कि खुद को एक मुकम्मल इंसान मानता हूँ,
मगर तन-मन-लगन से अच्छा अपने को समझता हूँ।
दूसरों के बजाय सदैव खुद का हीं आकलन करता हूँ,
बेशक अच्छे बदलाव के लिये कोशिश करता रहता हूँ।
