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pratibha dwivedi

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कोरोनाकाल और होली

कोरोनाकाल और होली

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दूर दूर से तकना अबके पास ना आना होली में,

हो ना जाए कोरोना ध्यान ये रखना होली में !!


लाल गुलाबी नीले पीले, रंग तो मन ललचायेंगे,,

लालच में रंगने की लेकिन, आ मत जाना होली में !!!


अँखियों के पेंच लड़ा लेना, प्रेम रंग बिखरा देना,

मन से मन को रंग देना, अबके बरस इस होली में !!


छू लेना मन के जज्बातों को, एहसासों को रंग देना,

अपनेपन के रंग से सबको, रंगना अबकी होली में!!


मन में हिलोर सी मच जाए, रोम रोम पुलकित हो जाए,

हर्षोल्लास के रंग से सबको, रंगना अबकी होली में !!


मन को संयम में रखना, छूना मत केवल तकना,

नैनों की मीठी तकरारें ही, करना अबकी होली में !!!


मुस्कान लबों पर खिली रहे, देह स्वास्थ्य भी बनी रहे,

छू ना पाए तन कोरोना, बच के रहना अबकी होली में !!



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