STORYMIRROR

Rajesh Mishra

Others

2  

Rajesh Mishra

Others

कल्पनाएं

कल्पनाएं

1 min
444

व्याकुल मन की बातें

कल्पनाओं के सहारे

सांत्वना देती हैं मन को


कल्पना कोई भी हो

कभी कोरी नहीं होती है

बीज के बिना भी कहीं

तरूवर की उत्पत्ति होती है


नींव है यथार्थ तो

कल्पना इमारत है

बीज तो सच्चाई है

पर कल्पना ही वृक्ष की ऊंचाई है


कल्पनाओं को सजाते समय

हम ये क्यों भूल जाते हैं

यथार्थ की धरा पर ही

कल्पनाओं के वृक्ष उगते हैं



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन