STORYMIRROR

जिद्द ना करो

जिद्द ना करो

1 min
717


जिस्म की भूख कब मिटी है जो अब मिट जाएगी

दिल में बसे रहो, घर बसाने की जिद्द ना करो


संस्कृति का उपासक हूँ मैं, पथ ना भटकाओ

दोस्त बने रहो, गोश्त चखने की जिद्द ना करो


कब इन्कार किया है कि चाहत नहीं है तेरी

पुजारी ही रहने दो, हवस की जिद्द ना करो


खुश हूँ पर खुशी में बस इज़ाफा कर रहा हूँ

एक को मिटा दूसरी लाने की जिद्द ना करो



Rate this content
Log in