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S Ram Verma

Others

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S Ram Verma

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हम और तुम

हम और तुम

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अपने-अपने मुखौटों में हम-तुम

कैसे खुद को छुपा कर बैठ गए है


हम-तुम अपने-अपने मैं के साथ रहे

और बाकी सब को हम भूल गए है


सपने जो हम ने साथ-साथ देखे थे

सारे वो फिर कैसे तार-तार हो गए है


देखने में तो मैं अब भी कली ही हूँ

पर मुझ पर भी भँवरे मंडरा गए है

 

क्या हम अपने-अपने मैं को त्याग कर

तुम और मैं भी अब हम हो गए है !


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