STORYMIRROR

अरविन्द त्रिवेदी

Others

3  

अरविन्द त्रिवेदी

Others

बहन

बहन

1 min
48

पराजय को बदलकर 

जीत वह साकार कर देती,

उपस्थिति को हमारी वह 

स्वयं उपहार कर देती,

पिरोकर नेह अपना 

बाँधती राखी कलाई पर,

बहन पगधूलि से अपनी 

सुखद संसार कर देती।।


पवन बन ज़िन्दगी से 

दर्द की बदरी हटाती है।

अधर भर मुस्कुराहट वह 

सदा आँगन सजाती है।

लगाकर माथ पर टीका 

दुवाओं से नवाजे वह -

दुखों की धूप बहना 

निज दुलारों से घटाती है।।


   


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन