मेरी पगडंडी उसी ओर है मेरा गांव उसी ओर है। मेरी पगडंडी उसी ओर है मेरा गांव उसी ओर है।
फिर से बन के गोलू भोलू गांव की मिटटी कैसे भूलूँ। फिर से बन के गोलू भोलू गांव की मिटटी कैसे भूलूँ।
न जाने कौन से शहर में रहते हो न तुम्हारा पता है और न ही ठिकाना। न जाने कौन से शहर में रहते हो न तुम्हारा पता है और न ही ठिकाना।
गांव की गलियों में नित घूमता मन, दम घोंटू शहरी जिंदगी से अब हुई अनबन। गांव की गलियों में नित घूमता मन, दम घोंटू शहरी जिंदगी से अब हुई अनबन।
निर्धनता में देखिए, रंग गुलाल विहीन। फिर भी होली गाँव की, होती है रंगीन।। निर्धनता में देखिए, रंग गुलाल विहीन। फिर भी होली गाँव की, होती है रंगीन।।
मिट्टी की सोंधी सुगंध से सद्भावों की अलख जगाएँ। मिट्टी की सोंधी सुगंध से सद्भावों की अलख जगाएँ।