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अकेलापन बरसों पढ़ाया हाल ज़िन्दगी इंसान तुम seedhibaat छोड़ घिघियाना सीधीबात मुँह चुप्पी तोड़ इशारे रिश्ते हौसला अब हूँकार कुछ बोल भूख लगी हो और कोई बोल भी दे तो मुझे जहर हो जाता है डर नहीं काम

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