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इशारे रंगों हाल ज़िन्दगी बरसों अकेलापन सिधिबात कड़वे बोल सीधीबात तुम डर नहीं इंसान चुप्पी तोड़ सुन भूख लगी हो और कोई बोल भी दे तो मुझे जहर हो जाता है पसंद छोड़ घिघियाना शब्दों समाज रिश्ते

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