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Anita Bhardwaj

Others


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Anita Bhardwaj

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फिक्र या निगरानी

फिक्र या निगरानी

4 mins 255 4 mins 255

वसुधा की शादी थी, शादी के वक़्त उसकी सहेली नीरा ने बोला "- अब बहुत हो गया घूमना फिरना, आकाश को ज़रा निगरानी में रखना। लड़कों से ज्यादा, लड़कियां दोस्त हैं उसकी।"

वसुधा -"मुझे यकीन है मेरे प्यार पर, तभी तो लव मैरिज कर रही हूं। जब प्यार है तो निगरानी कैसी?"

वसुधा के इतने भरोसे को देखकर उसकी सहेली के मन में बहुत से ख्यालों के बादल बने और मिटे।


वसुधा की विदाई हो गई, अपने सपनों के राजकुमार को पाकर आज वो अलग ही आसमान पर थी।

आकाश की भी नजरें, जैसे ठहर गई वसुधा को यूं शादी के जोड़े में देखकर।


सबसे नजरें चुराकर, एक दूसरे से आंखों ही आंखों में बहुत बातें हुई।

शादी के बाद दोनों ' ड्रीम टूर ' पर गए, और बहुत खुश थे।

एक दिन वसुधा के फोन पर फोन आया, वो किचन में थी, आकाश ने फोन अटेंड किया। सामने वाले ने आकाश की आवाज़ सुनकर फोन रख दिया।


आकाश - " वसुधा , फोन था तुम्हारा।"

वसुधा - "कोई नहीं, कुछ काम होगा तो दोबारा आ जाएगा।"

फिर से फोन की बैल बजी और वसुधा ने बात की -" कौन?"

कॉलर -"अरे , भूल भी गई इतनी जल्दी ! मैं जतिन ।"

वसुधा -" अरे जतिन, इतने साल बाद ! आज कैसे याद आ गई?"

जतिन - " बस कुछ दिन पहले पुराने दोस्तों से मिला तो तुम्हारा नंबर मिला। शादी बहुत बहुत मुबारक।"

वसुधा -" चलो अब नंबर मिल ही गया तो टच में रहना फिर से गायब मत हो जाना।"

आकाश - " क्या ये तुम्हारा मेल- मिलाप कुछ टाइम बाद हो सकता है? मुझे ऑफिस जाना है लंच पैक कर दो।"

जतिन -" सॉरी यार, बाद में बात करता हूं।"


वसुधा बहुत हैरान थी आकाश को क्या हो गया, इससे पहले सब दोस्त साथ आउटिंग के लिए जाते रहे हैं, कभी ऐसा रिएक्ट नहीं किया।


वसुधा ने टिफिन दिया और आकाश बिना ' बाय ' बोले ही चला गया।

पूरे दिन वसुधा के मन में यही उधेड़ बुन रही, घड़ी पर नजरें ऐसे टिकाए रही की; अभी सारी सुइयां घुमा दूं और शाम हो जाए तो मैं पूछूंगी आकाश से इस रिएक्शन का क्या मतलब था ?

आकाश उस दिन अपने रोज के टाइम से लेट हो गया। तो वसुधा ने आकाश को फोन किया।

वसुधा -" आकाश कहां हो?"

आकाश -" तुम्हें इससे क्या मतलब, शादी हुई है अपने लिए चौकीदार नहीं लाया मैं। मेरी भी प्राइवेट लाइफ है। "

वसुधा को एक के बाद एक झटके लग रहे थे, क्या ये सच में वही आकाश है जो शादी से पहले मेरे पल पल की खबर लेता था। अगर मै एक बार फोन ना भी उठा पाऊं तो बार बार फोन करता था।

वसुधा ने परेशान होकर अपनी दोस्त नीरा को फोन किया और अपनी प्रॉब्लम बताई।

नीरा -" देखो ! तुम्हें शादी के वक़्त बोला था मैंने की अब शादी हो गई अब थोड़ी निगरानी रखना। पर तुम समझी नहीं, पति हमेशा पति ही रहता है चाहे अरेंज मैरिज हो या लव मैरिज।"

वसुधा -" नहीं नीरा ! आकाश औरों जैसा बिल्कुल नहीं है, तभी तो मैंने उससे शादी की। वो तो मेरी इतनी फिक्र करता था कि अगर मैं फोन नहीं भी उठा पाती थी तो घर तक पहुंच जाता था, परेशान होकर।"

नीरा -" तुम कब समझोगी वसुधा, वो फिक्र नहीं निगरानी होती है।"

वसुधा ने फोन डिस्कनेक्ट कर दिया।

आकाश घर आया, -" मैंने खाना खा लिया बाहर, तुम अपना देख लेना ।"

वसुधा को खाने का कहां होश था, वो तो अपने सवालों में घिरी हुई थी।

आकाश का फोन आया और वो बाहर चला गया सुनने के लिए।

वसुधा -" तुम्हारी तबीयत ठीक है? कोई परेशानी है तो हम बात कर सकते हैं।"

आकाश -"आज के बाद जब भी मैं दोस्तों के बीच हो, तुम मुझे फोन नहीं करोगी।"

वसुधा -" तुम भी तो मुझे फोन करते थे ना मुझे भी फिक्र होती है तुम्हारी, इसलिए फोन किया।"

आकाश -" मुझे ये तुम्हारा निगरानी रखना पसंद नहीं।"

वसुधा -" मुझे प्यार है तुमसे, मुझे किसी निगरानी की जरूरत नहीं।

प्यार को जबरदस्ती खोया या पाया नहीं जा सकता, जब तक अपनी सहमति ना हो।"

आकाश -" अपना ये लेक्चर बंद करो और मुझे सोने दो।"

वसुधा ने शादी के बाद जॉब छोड़ दी थी, नीरा के कहने पर उसने फिर से ज्वाइन कर लिया, ताकि खुद को स्ट्रेस से दूर रख सके।

आकाश -" कहां हो? मैं तुम्हारे ऑफिस के बाहर हूं, आज साथ चलते हैं।"

वसुधा खुश हुई। और जल्दी से फ़ाइल रख कर नीचे आ गई।

आकाश -"तुम ऑफिस में सिंदूर लगा कर नहीं आती हो ? अभी भी अनमैरिड ही लग रही हो। बेकार ही किसी को गलतहमियां हो इससे अच्छा है तुम शादी शुदा दिखो।"

वसुधा के सब्र ने जवाब दे दिया था, वसुधा गाड़ी से उतरी और बोल दिया -" तुम यहां मेरी फिक्र के चलते आए हो या मेरी निगरानी रखने? तुम कौन सी निशानी लेकर चलते हो जिससे कोई तुम्हें शादीशुदा समझे?

मेरा प्यार ही विश्वास है, अगर तुम भी मुझे प्यार करते हो तो फिर " निगरानी कैसी" ????..

( वसुधा का खुद के लिए ये जवाब देना ही, आकाश को खुद के प्यार पर सोचने के लिए मजबूर कर गया)...



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