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Sanjay Aswal

Others


4.7  

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अनुभव खट्टे मीठे (संस्मरण)

अनुभव खट्टे मीठे (संस्मरण)

9 mins 251 9 mins 251

अस्पताल के दूसरे फ्लोर पर कोविड वार्ड बना था। कोने वाले कमरे में एक बिस्तर लग रहा था।  नर्स सारे जरूरी उपकरण लगा रही थी। यह एक सरकार अनुबंधित अस्पताल था जो उत्तराखंड सरकार के चुने हुए कोविड अस्पतालों में एक निजी अस्पताल था। मुझे याद है, मैं कैसे अस्पताल को देखकर घबरा गया था, अभी चार दिन पहले ही मुझे हल्का बुखार आया था, तब मैंने मोहल्ले के एक डॉक्टर से चिकित्सकीय परामर्श लिया और उन्होंने दवाई के साथ साथ कुछ टेस्ट भी करने को कहा जिनमें कोविड -१९ का आर टी पी सी आर टेस्ट भी था।

 मैंने कल ही टेस्ट करवाया, आज रिपोर्ट भी आ गई तो रिपोर्ट देख कर मैं डर गया क्यों की रिपोर्ट पॉजिटिव थी। अब तरह तरह बातें दिमाग़ में आने लगी, आस पास के माहौल में सुनी सुनाई बातों ने दिमाग और खराब कर दिया, कन्फ्यूज़न सा होने लगा, अभी मुझे बुखार नहीं था मगर रिपोर्ट को देख कर पता चल गया कि कोरॉना वायरस शरीर में घुस चुका है, मैंने तुरंत खुद को एक कमरे में आइसोलेट कर लिया, मुझे अपने परिवार अपने बच्चों की ज्यादा चिंता होने लगी थी। अपना सारा सामान अलग कर लिया और कमरे में आराम करने चला गया, अभी कुछ घंटे ही हुए थे कि अचानक मेरे फोन की घंटी बजने लगी, मैंने फोन उठाया तो पता चला फोन उत्तराखंड सरकार के चिकित्सा विभाग से आया था, उन्होंने बताया कि आपको तुरंत अस्पताल में भर्ती होना होगा, मैंने उनसे कहा कि मैंने खुद को आइसोलेट कर लिया है तो उधर से जवाब मिला सरकार की गाइड लाइन के निर्देशानुसार हर कोरोंना पॉजिटिव को अस्पताल में रखा जाता है। आप जल्दी से अपना जरूरी सामान बांध ले, एंबुलेंस आपके घर की ओर निकल चुकी है। मेरे घर वाले सभी बहुत परेशान थे, मैंने उन्हें कहा मुझे कुछ नहीं होगा आप लोग ज्यादा चिंता ना करें, हालांकि मैं खुद डरा हुआ था पर मैंने खुद को संभाला अपना सामान जल्दी जल्दी पैक किया और एंबुलेंस का इंतजार करने लगा, कुछ ही देर में एंबुलेंस घर के बाहर आकर खड़ी हो गई। पूरा मोहल्ला भीड़ बनकर ऐसे देख रहा था जैसे मैंने कोई अपराध किया हो या मैं सर्कस का कोई जोकर हूं, खैर मैं सामान के साथ चुपचाप बुझे मन से एंबुलेंस में बैठ गया, मेरे बच्चे मां पिताजी और मेरी धर्म पत्नी के चेहरों को देख कर मुझे अच्छा नहीं लग रहा था, पर क्या करता बुझे मन एंबुलेंस में बैठ कर अस्पताल की और चल पड़ा।

मेडिकल टीम द्वारा मुझे एक सरकारी अनुबंधित नामी अस्पताल में भर्ती कराया गया, ये एक प्राइवेट अस्पताल था जहां सब कुछ फाइव स्टार जैसा लग रहा था। मुझे दूसरे फ्लोर में ले जाया गया जहां कोविड वार्ड तैयार किया गया था, वहां का स्टाफ पहले से ही तैयार था, वो मुझे एक रूम में ले गए जहां मुझसे मेरा पूरा ब्योरा मांगा गया, मेरी सारी रिपोर्ट को मुझसे ले लिया गया और एक रूम की ओर जाने की कहा गया, मैं अपने सामान के साथ उस कमरे में चला गया जहां मेरे लिए बिस्तर पहले से ही तैयार किया गया था। कमरा साफ़ सुथरा था, मैं जाकर बेड में बैठ गया और सोचने लगा। मुझे अजीब अजीब ख्याल आ रहे थे। मुझे खुद पर हंसी आ रही थी पर मेरा चेहरा रुआंसा सा था। कुछ देर बाद मैंने अपने को संभाला खुद को नॉर्मल किया अपने कपड़े बदले और मुंह हाथ धो कर टीवी ऑन किया और बिस्तर पर लेट गया। अभी मुझे कुछ समय ही कमरे में हुए थे कि दरवाजे पर अस्पताल के कर्मचारी ने दस्तक दी मैंने उसे अन्दर आने को कहा वो एक बोतल गरम पानी मेज पर रख कर बोला मास्क पहन लीजिए, मुझे अहसास होने लगा कि ओह मैं तो कोरोना पॉजिटिव हूं।

अब घर की याद आने लगी, बच्चों की चिंता होने लगी थी, कहीं मेरे कारण वो सब भी बीमार ना पड़ जाएं। इसी चिंता में रात आंखों में कट गई पता ही नहीं चला। सुबह खिड़की से धूप की एक किरण कमरे को ऐसे प्रकाशमय करने लगी जैसे सब कुछ बदल गया हो। तभी दरवाजे पर जोर की दस्तक हुई, मैं पलंग से उठ कर दरवाजे तक आया तो देखा अस्पताल का कर्मचारी नाश्ता लेकर आया और मेज पर रखते हुए मुझसे कहा उठा लीजिए, और हां सुनिए मास्क पहनने की आदत डालिए ये आप के लिए और अन्य सभी के लिए अच्छा होगा।

कर्मचारी की सख्त हिदायत सुन कर मैंने चुपचाप सर हिला कर कहा ठीक है और मास्क पहन लिया।

फिर जैसे ही कर्मचारी कमरे से बाहर गया मैं फौरन नाश्ते के लिए मेज की ओर लपका, अरे वाह दलिया, केला, अंडा परांठा गरम पानी विटामिन सी की गोलियां सब था, फटाफट सब खाया और इत्मीनान से अपने पलंग पर जा बैठा।

कुछ देर बाद डॉक्टर और नर्स आई और दूर से ही पूछा क्या बुखार या खांसी है, कोई दवाई तो पहले से नहीं चल रही, मैंने एक एक करके सारी जानकारी डॉक्टर को बताई और ये भी कहा कि मुझे बुखार नहीं है, डॉक्टर ने कहा ये अच्छे लक्षण है कि बुखार नहीं है। ये सुनकर अच्छा लगा कि बुखार ना आना मतलब वायरस ज्यादा पकड़ नहीं बना पाया, अभी सब कंट्रोल में है।

बस यही दिमाग में रखा की सब नॉर्मल है और ऐसे ही चलना चाहिए।

ऐसे ही कुछ दिन आराम से, दवाइयों, टेस्ट, रोज ब्लड टेस्ट और चेस्ट के एक्सरे में गुजरने लगे। खाली समय में मैं अपनी गाथा लिखने में मशगूल रहने लगा, कुछ कविताएं लिखी, कुछ अपने अनुभव इस कोवीड के दौरान हुए उन्हें भी कलमबद्ध किया। इस दौरान मैंने अस्पताल का जमकर नाश्ता किया, खूब गाने गाए, गाने सुने, शायद वर्षों बाद ऐसा अवसर मिला जब कोई रोकने टोकने वाला नहीं था। अपने शरीर की भी खूब आव भगत की, मां ने जो ड्राई फ्रूट काजू बादाम पिस्ता दिए थे उनका भी नियमित सेवन करता रहा। समय के सदुपयोग के लिए मैंने खुद को दस दिन चैलेंज दिया जिसमें मैंने चेस्ट और शोल्डर की काफी एक्सरसाइज की, रोज चालीस पचास पुशअप दंड बैठक और सिट उप करता था। नियमित खाना काढ़ा गरम पानी विटामिन सी आदि और साथ में कविताएं चलती रही।

कभी जब बच्चों की याद आती तब मन मायूस हो जाता, अकेलेपन से दिल घबराने लगता तो ध्यान भटकाने के लिए मम्मी पापा पत्नी से बात करता, बच्चों से बात करता तो दिल को बहुत सुकून मिलता।

इन दिनों मैंने खूब फिल्में भी देखी। जब मन करता खिड़की खोल कर बाहर का नज़ारा देखता लोगों को आते जाते देख मन में एक उमंग जाग जाती दिल को शांत रखने के लिए ये जरूरी भी था।

इन सब के बावजूद एक एक दिन भारी पड़ रहे थे हालांकि मैंने खुद को व्यस्त रखा हुआ था पर अंदर ही अंदर टूट रहा था, मुझे मालूम था मैं कोवीड पॉजिटिव हूं।

अस्पताल का स्टाफ बहुत कोऑपरेटिव था, समय पर चाय खाना हल्दी वाला दूध काढ़ा समय पर मिल जाता। टीवी पर अक्सर जब न्यूज देखता कि इस राज्य में इतने लोग कोरोना से मर गए, अस्पताल में मरीजों के लिए बेड नहीं हैं, लोग परेशान हैं, टेस्ट के लिए लम्बी लम्बी लाइन लगी हैं तो दिल बैठ जाता।

पर फिर थोड़ी राहत मिलती कि चलो यहां ऐसा कुछ नहीं है पर लोगों के लिए अफसोस होता, दिल भी बहुत दुखता।

दूसरी ओर समय निकलने को तैयार नहीं था, आज अस्पताल में मुझे सातवां दिन था और मैंने नर्स से पूछा कि मैं कब डिस्चार्ज हो पाऊंगा तो कहती कुछ दिन और बस......

आज चेस्ट का एक्सरे भी हुआ उसमें डॉक्टर्स को थोड़ा संशय रहा, बाएं फेफड़े में थोड़ा निमोनिया दिख रहा था और कुछ स्पष्ट भी नहीं हो पाया तो डॉक्टर ने सीटी स्कैन के लिए कहा, तो शाम को सीटी स्कैन भी होना है तभी कुछ क्लियर हो पाएगा।

अस्पताल की चार दीवारी में अब दम घुटने लगा था, कविताएं अनुभव गानों एक्सरसाइज सब धीरे धीरे भारी पड़ने लगा था।

आज नर्स दीदी ने कहा "आपका कोवीड आरटीपीसीआर होना है तो आप मास्क और पी पी ई किट पहन कर टेस्ट रूम में पहुंचे, वहां पहुंचने पर मुझसे पहले चार लोग अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे, सच कहूं उस रूम में ना पंखा था ना खिड़कियां, पी पी ई किट में बैठे बैठे मैं अंदर से पसीना पसीना हो गया था,सांस लेना भारी हो रहा था, बहुत बुरा हाल था, खैर कुछ देर बाद मेरा नम्बर आ गया उन्होंने मेरा सैंपल लिया और एक दिन और इंतजार करने को कहा।

आज बेचैनी के साथ घबराहट भी बहुत हो रही थी, अंदर से डरा हुआ था कि अगर टेस्ट फिर से पॉजिटिव रहा तो क्या होगा, ये सोच सोच कर आंखों से आंसू आने लगे, बच्चों की बहुत याद आ रही थी, एक ही शहर में होने पर भी कितना दूर हो गया था, बस यही सोचते सोचते आज पूरा दिन निकल गया, बिस्तर पर लेटे लेटे कब नींद लग गई पता ही नहीं चला। 

रात को नींद टूटी तो मन में बुरे ख्याल आ रहे थे। आज कुछ खाने का मन भी नहीं हुआ बस काफी देर तक सोचता रहा पता नहीं क्या क्या बुरे ख्याल दिमाग में आ रहे थे।

सुबह जल्दी उठ गया और बेसब्री से नर्स का इंतजार करने लगा कि जब नर्स दीदी आएगी तो सबसे पहले यही पूछूंगा की मेरी रिपोर्ट आई।

नर्स कुछ देर बाद कमरे में आई और आते ही उसने मुझसे पूछा आज तबीयत ठीक है उदास बैठे हो कोई बात हुई क्या, मैंने कहा नहीं सब नॉर्मल है तो नर्स दीदी बोली लग नहीं रहा कुछ उदास से दिख रहे हो, मैंने पूछा मेरी रिपोर्ट कब तक आएगी तो नर्स बोली कल शाम या परसों सुबह तक। 

ये दिन कैसे कटेंगे ये सोच कर दिल उदास हो गया।

दिन गुजर रहे थे आज नवां दिन था मुझे बेचैनी होने लगी थी, मन उखड़ा उखड़ा था, धड़कने बहुत बढ़ गई थी,कुछ करने का मन नहीं था, शाम को नर्स दीदी रूम मे आई और मुझे मेरी रिपोर्ट देते हुए कहा बधाई हो आपकी रिपोर्ट नेगेटिव है,तो सच कहूं जिंदगी में पहली बार मैं अंदर से इतना खुश था जितना कभी नहीं हुआ, ऐसा लगा जैसे मैंने हारी हुई जंग जीत ली हो, दिल बहुत खुश हो गया।

आज अस्पताल में मेरा बारहवां दिन था और मैं खुशी से झूम रहा था।

शाम को मुझे अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया, मैंने अपना सारा सामान बैग मे भरा और बाहर काउंटर पर रिपोर्ट कलेक्ट की और घर की ओर निकलने कि तैयारी में बाहर आ कर बैठ गया।

अस्पताल से कुछ निर्देश भी दिए गए जिनका मुझे आने वाले ७ दिन अक्षरशः पालन करना था।     मुझे घर में सात दिन आइसोलेट रहना था पर मुझे अब बुरा नहीं लग रहा था क्यों की अब घर में रहना था अपनों के बीच चाहे अलग कमरे में ही सही।

अब एंबुलेंस आ चुकी थी और मैं उस में बैठ कर घर की ओर निकल पड़ा।

मुझे उम्मीद है मेरे जैसे दूसरे कोविड पेसैंट भी एक दिन ख़ुशी खुशी अपने घर जाएंगे।

मैं उम्मीद करता हूं, ये महामारी जल्दी काबू में आ जाएगी, सभी लोग फिर से अपनी पुरानी दिनचर्या में लग जाएंगे, सभी अपने अपने परिवार के साथ फिर से एक साथ बैठ कर हंसी खुशी समय बिताने लगेंगे।

सब पहले जैसा हो जाएगा,

"ईश्वर करे ऐसा ही हो।"



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