मैं प्रेम हूँ दर्द से भरा हुआ मैं अनोखा भी। मैं प्रेम हूँ दर्द से भरा हुआ मैं अनोखा भी।
पर अब खोने को क्या था उस बावली का आंसू और कुछ नहीं था उसका पर अब खोने को क्या था उस बावली का आंसू और कुछ नहीं था उसका
बसन्त का मौसम जब आता है, साथ नई ख़ुशियाँ लाता है। बसन्त का मौसम जब आता है, साथ नई ख़ुशियाँ लाता है।
हे मनमोहन मनभावन तुमरे कारन मै बावरी बावरी बावरी! हे मनमोहन मनभावन तुमरे कारन मै बावरी बावरी बावरी!