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दो कुलों का यह पावन संगम समृद्धि प्यार सनातन आर्य संस्कृति मेहंदी वचन निभाते आजीवन मुखड़ा सात जन्म हैं रहते साथ सराहनीय-अनुकरणीय लाज प्रियतम मनभावन दो संस्कृतियों प्रफुल्लित रखना है मन एकं दूजे के इकलौते साथी सतरंगी मन युवा काल पावन संस्कार दर्पण मान और अभिमान

Hindi पाणिग्रहण Poems