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टूटी फूटी हिन्दीकविता उम्मीद ना जाने क्यूँ समतल समेट कबतक कोना मंजिल घर सड़क मैली पराये उद्देश्य मां चारपाई जीवन hindikavita कारवां बूढ़े

Hindi टूटी Poems