STORYMIRROR

MANISHA JHA

Others

4  

MANISHA JHA

Others

यादें जन्नत की

यादें जन्नत की

1 min
425

याद है तुमको 

कश्मीर की सर्दी और ढेरों फ़ौजी वर्दी

वो बर्फीला मौसम,निर्मम ठण्ड का आलम

कहवा का कप, साथ की गप्प-शप्प

बस यही राहत देती थी।

फेरन का पहनावा और कश्मीरी दोस्तों का बुलावा

इतने प्यार और तहजीब से की गयी मेहमानवाज़ी

इतना कुछ परोसा था मेजबानों ने

मोहब्बत और आँखों से छलकता स्नेह

उनके अल्फाजों से टपकता हुआ नेह

आज भी ताज़ा है।

ये यादों के एल्बम पलटने की जरूरत नहीं होती

ये तो मानस पटल के पहले पन्ने पर ही अंकित हो गयी है।

पहलगांव वाले रास्ते और गुलमर्ग के बर्फ 

हाउस बोट का शिकारा और डल झील का किनारा

आज भी बुलाती है.....आऊँगी जरूर

बादाम, अखरोट और सेब के दरख़्त

आज भी याद आते हैं, जाऊँगी जरूर।

वो सिक्स को सीकीस बोलना, उनकी भाषा बिल्कुल ना समझना

फ़िर भी इतने साल वहां बिताना

ढेरों समीर और शकील से मिलना 

यादों का पिटारा,और मोटे-मोटे स्वेटर का बक्सा 

जब खुलता है, पुराने वक्त का आयना सामने लाता है 

जन्नत की वादियों की बहुत याद दिलाता है।



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन