मन मलिन है ,प्राण व्यथित है ,अब तो पार कीजे। मन मलिन है ,प्राण व्यथित है ,अब तो पार कीजे।
तुम्हारी यादों की आहट, आज भी मेरे मन के, एहसासों से मुझे पुकारती है। तुम्हारी यादों की आहट, आज भी मेरे मन के, एहसासों से मुझे पुकारती है।
सुकून देने वाली, ठंडी हवा ने छुआ हो...! सुकून देने वाली, ठंडी हवा ने छुआ हो...!
सुन रही हूं इन लहरों का शोर, आहिस्ता आहिस्ता खामोश हो रहा ये शोर,।। सुन रही हूं इन लहरों का शोर, आहिस्ता आहिस्ता खामोश हो रहा ये शोर,।।
यह ज़िन्दगी है यारों, यहां रोज़ लगता एक मेला है। यह ज़िन्दगी है यारों, यहां रोज़ लगता एक मेला है।
A poem about changing the centres A poem about changing the centres