STORYMIRROR

सिलसिला

सिलसिला

1 min
280


ना ही किसी को जानते है

ना ही किसी को पहचानते है

हो जाती है सब से दोस्ती

अपने से सब लगने लगते है

दूर है सब कोई पास नहीं

फिर भी लगते करीब करीब है


नहीं ये रिश्ता दिलो का

ये बन्धन तो है रूहो का

सब की खुशी में हंस लेते है

सब के गमो में रो लेते है

सब से रूठ जाते है कभी

सब के करीब फिर हो जाते है


कोई प्रेरणा बन कर बस गया

मेरे दिल मे

और लिखने का हुनर सीखा गया

हम भी दिल की बाते लिखते है

और शायद किसी की प्रेरणा बन जाए

और वो भी लिखने को प्रेरित हो जाये

ये सिलसिला यू ही चलता रहे

चलते रहे ये कोशिश है हमारी


Rate this content
Log in