सहर के पहर में
सहर के पहर में
1 min
241
सूरज को खिलते देखा
चिड़ियों को उड़ते देखा
सैर पर जाते लोगों को देखा
अख़बार फेंकते हाथों को देखा
ये देखा, ये सब देखा एक ही शहर में
सहर के पहर में
सुबह को जागा, दोपहर नहीं
हर क्षण को जागा, दो पहर नहीं
सुबह की मेहनत देखी, दोपहर की धूप नहीं
दिखी केसरी सूरज की, गुस्से में लाल गाल नहीं
ये देखा, ये सब देखा एक ही शहर में
सहर के पहर में
