सागर को गागर में
सागर को गागर में
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1- तुममें बल बुद्धि विवेक,
का गागर है।
हे शूरवीर तुम सबको,
अपना आदर है।।
2- तुम शून्य से पहुंच चुके हो,
आज शिखर पर।
तेरे बल बुद्धि की गाथा,
नगर डगर पर।।
3- हे लौह भुजाओं की,
ताक़त रखने वाले।
तुम क़ैद कर सको,
सागर को गागर में।।
4- नायक समाज की,
देश की रखवाली करता।
खलनायक - दुश्मन को हरदम,
औकात में वह रखता।।
5- तुममें, हममें, सबमें,
वह क्षमता है।
मां पिता सहित भारत की
धरती की भी ममता है।।
