रचनात्मकता
रचनात्मकता
1 min
265
रचनात्मकता होड़ नहीं करती
ये खामोशियों में पलती है शोर नहीं करती
कल्पना के सबके अपने -अपने आयाम हैं
नये -नये रंगों में, चाहतों के अनुरूप है ढलती
रचनात्मकता होड़ नहीं करती।
अपनी सोच से आकाश को मुट्ठी में है भरती
रगों में खून सभी के है बस ये संचार नये करती
तनहाइयों में अंगड़ाइयाँ लेती है, और भीड़ में है सोती
रचनात्मकता होड़ नहीं करती।
