पथ पर चलते चलते......
पथ पर चलते चलते......
पथ पर चलते चलते
पैर फिसल जाता है
गलती से गलती न हो
ये भला कहाँ हो पाता है
समय रहते जो दिख जाए
वह फिर गलती न कहलाए
गलती होना आम बात है
नहीं कोई बड़ा अपराध है
काहे मन मे फिर संकोच आए
लौट चलो उस पथ पर वापिस
सुबह जहाँ से दूर तुम आए
गलती का जो हुआ एहसास
प्रयाश्चित करने का फिर
तुम दिखाओ साहस
सुबह का भूला जो
शाम को घर लौट आता है
फिर भूला नहीं कहलाता है।
