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Neetu Tyagi

Others

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Neetu Tyagi

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पिता जैसा भाई

पिता जैसा भाई

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भाई मैं क्यों दिखते हैं पिता

पिता थे तो भाई भाई दिखता था

भाई पिता के बाद भाई

स्वयं को समझता है पिता

पिता का दुलार

पिता का क्रोध

पिता की हंसी

सबकुछ पिता जैसी

पिता बादल थे बरस कर चले गए

तुम रहना सदा आकाश की तरह

खुशियां रहे सदा तारों की तरह

बहने नहीं देती कोई उपहार

पर दुआओं से पूरा भर देती हैं

भाई का संसार

भाई देता रहे सदा

पिता जैसा लाड़

इसीलिए तो बना था

राखी का त्यौहार!


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