नव प्रभात
नव प्रभात
1 min
365
बाल रवि की सुकोमल रश्मि
नूतन किसलय को चूम रही है
सुदूर आसमां में देखो तो
खग विहंग भी चहक रहे हैं
मंद समीर की एक छुअन से
कुसुमित उपवन में तरु झूम रहे हैं
देख प्रकृति की ये नव आभा
उत्कंठित नैना देखो चमक रहे हैं।
