नव प्रभात
नव प्रभात
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बाल रवि की सुकोमल रश्मि
नूतन किसलय को चूम रही है
सुदूर आसमां में देखो तो
खग विहंग भी चहक रहे हैं
मंद समीर की एक छुअन से
कुसुमित उपवन में तरु झूम रहे हैं
देख प्रकृति की ये नव आभा
उत्कंठित नैना देखो चमक रहे हैं।
