Buy Books worth Rs 500/- & Get 1 Book Free! Click Here!
Buy Books worth Rs 500/- & Get 1 Book Free! Click Here!

Bhãgyshree Saini

Children Stories Children


3.6  

Bhãgyshree Saini

Children Stories Children


मेरा नन्हा सा बचपन

मेरा नन्हा सा बचपन

1 min 310 1 min 310

जाने कहां गया

वो मेरा नन्हा सा बचपन

जिसकी आंखों में था 

गुड़िया के संग खेलने का

स्वप्न।।


जाने कहां गया वो

मेरा नन्हा सा बचपन।

ना कोई चाह थी, ना कोई

लक्ष्य, बस पापा के कंधों

पर बैठकर उनकी मूछें

खींचने का था स्वप्न।।


मां ओर भाई के साथ

लुका छिपी खेलने का आनंद

ओर नाना नानी के बाहों में सर

रखकर सोने का सुकून।

जाने कहां खो गया

वो मेरा नन्हा सा बचपन।।


ना होड़ थी आगे बढ़ने की

ना जंग थी किसी से लड़ने की

बस एक ही इच्छा थी

अपनी गुड़िया के संग खेलने की

मिट्टी के घर बनाने की।

न जाने कहां खो गया

वो मेरा नन्हा सा बचपन


Rate this content
Log in