मेरा छोटा भाई
मेरा छोटा भाई
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जब वो घर आता है
घर में रौनक ला देता है
उसके आने से घर - घर बन जाता है
उसका मेरे से लड़ना
और मुझे बात - बात पर चिढ़ना
बन जाता है मेरे लिए एक अफसाना...
उसका जब होता है जाना
मानो घर में सन्नाटा छा जाना
उस दिन सब लग जाते है उसकी जाने की तैयारी में
कभी कपड़े, तो कभी किताबें और खाने का समान
ठीक से रख लिया ना....
वो कहता नहीं है लेकिन
जितनी हमारी आँखों में पानी होता है
उससे ज्यादा उसके चेहरे पर बेरुखी
और अंदर से दिल रोता है
लेकिन ठीक है...
जिंदगी को बेहतर बनाने के लिए
सबको बाहर जाना ही पड़ता है
और घर वालों से दूर ये सब सहना ही पड़ता है..
