# मेरी प्यारी सखी
# मेरी प्यारी सखी
1 min
385
माना तू नाराज़ है
इसका मुझे आगाज है
पहले जैसा कुछ नही
माना तेरे लिए मे अब कुछ नही
पहले बातें होती थी हजार
लेकिन अब होती नही है एक बार
तू आज भी है मेरे जीवन का हिस्सा
फिर चाहें तूने मिटा दिया हो ये किस्सा
पता नही क्या रिश्ता है
जो दूर रहकर भी अपना लगता है
माना अपनी जगह तू सही है
लेकिन हर गलती की वजह म नही
अब बातों मे नही रही मिठास
इसलिए हमारी दोस्ती मे आ गई खटास।
