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RUCHI mudgal

Others

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RUCHI mudgal

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# मेरी प्यारी सखी

# मेरी प्यारी सखी

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माना तू नाराज़ है

इसका मुझे आगाज है

पहले जैसा कुछ नही

माना तेरे लिए मे अब कुछ नही

पहले बातें होती थी हजार

लेकिन अब होती नही है एक बार 

तू आज भी है मेरे जीवन का हिस्सा

फिर चाहें तूने मिटा दिया हो ये किस्सा

पता नही क्या रिश्ता है

जो दूर रहकर भी अपना लगता है

माना अपनी जगह तू सही है

लेकिन हर गलती की वजह म नही 

अब बातों मे नही रही मिठास

इसलिए हमारी दोस्ती मे आ गई खटास। 

 


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