कुदरत
कुदरत
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कुदरत के मौसम के रुप हैं अनेक
गर्मी, सर्दी, वर्षा और बसंत भी है एक
शीत का रोब जरा है सबसे न्यारा
कभी हेमंत, कभी शिशिर रुप बदले प्यारा
सफेद बर्फ की चादर ढक दे सबको ऐसे
तक दूर फैली हो सफेद रुई जैसे
पेड़ -पौधे ढक जाते बर्फ से सारे
हरा रंग छुप गया हो जैसे डर के मारे
प्रकृति हमें सीखा रही हो शांति तुम अपनाओ
सफेद रंग को अपने जीवन का अभिन्न रंग बनाओ ।
