किसी के ईमान से मत खेलो
किसी के ईमान से मत खेलो
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किसी के ईमान से मत खेलो यार,
तुम्हारी वफा के बहुत खुले हैं राज।
तुम चमक धमक पर मरते हो,
फिर हो कि हाय हाय करते हो।
कहते सब सुना हिम्मत न हुयी कहने को,
सत्ता का रौब क्या गुंडाराज है सहने को।
बहुत कुछ तो हस्ती बनाई गई है तुमने मिथ्या आधार,
आगामी पीढ़ी झेलेगी पीड़ा नहीं करेगी जिंदा याद।
