STORYMIRROR

ख्वाब

ख्वाब

1 min
258


मेरा मन ख्वाबो का शहर है

कोई सपना कभी भी आ जाए


कोई ना अब मुझे डर है

रोकूं भी तो क्यों रोकूं,


आखिर इनका ही तो घर है

साथी है ये मेरे अकेले पन के


देते है साथ चाहे कोई भी पहर है ।

एहसास भी जगाते है मन की बघियाँ मे


Rate this content
Log in