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Mahi Aggarwal

Others


5.0  

Mahi Aggarwal

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शिमला की बारिश

शिमला की बारिश

2 mins 264 2 mins 264

खिड़कियाँ सारी खोल दी झटपट

मेघो से आमंत्रण मिला मित्र स्वरुप

मन में प्रेम कोपलें फूटने लगी अब

मुझमे अंगड़ाइयाँ सी टूटने लगी तब

सारे बंधन तोड़ कर आई बाहर मैं

महकती लहकती हवाएँ चल पड़ी

मेरे मन में भावनायें मचल पड़ी

वादियों पहाड़ो में बहक बहता मन

बिन मौसम बरसात होने लगी

तन क्या मन भी भिगोने लगी

बारिश की झमझम उकसाने लगी

रोम रोम मेरा थिरकाने लगी

लटो से टपक कर बारिश की बूँदें

कमर को मेरे सहलाने लगी

खुश हो छम छम नाचने लगी

हाथ फैलाए मुँह ऊपर कर घूमती मैं

बारिश की बूंदो को होठो से चूमती मैं

वो भी कुछ कम नही बावली सी है

बावली हो मेरे बदन को चूमती वो

पेड़ो के इर्द-गिर्द फेरे लगाती मैं

कभी डालियाँ पकड़ झूल जाती मैं

डालियों को हिला हिला मस्ती में

चेहरे पर अपने बूंदो को गिराती मैं

शिमला की हसीन वादियो में अक्सर

बहारा बहारा सी हो खो जाती मैं


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