Become a PUBLISHED AUTHOR at just 1999/- INR!! Limited Period Offer
Become a PUBLISHED AUTHOR at just 1999/- INR!! Limited Period Offer

Shrddha Katariya

Others

3.3  

Shrddha Katariya

Others

खिड़कियाँ

खिड़कियाँ

1 min
388


ये बेहिसाब सी खिड़कियाँ

    क्यूँ न हम इनमें से थोड़ा सा झऀक ले

अपने हिस्से का आसमान नाप ले

     ये दरवाज़ा तो नहीं है मगर

एक उम्मीद का झोंका देती है मगर

     जहाँ से थोड़ी धूप छांट ले

थोड़ी बारिश की बूँद बांट ले

    ये खिड़कियाँ ही तो है जो हमे, 

चाय के साथ बैठने पर मजबूर करती है    

    वरना हम को हमारे लिए,

भी कहाँ फुर्सत मिलती है

सुकून दे जाती है ये खिड़कियाँ

ये बेहिसाब सी खिड़कियाँ ....


      




Rate this content
Log in