कौन
कौन
1 min
156
कुछ फुर्सत के पल निकालिये
आपस में मिलता कौन है।
अपनों में अपना यार खोजिये
इनमें दर्द बांटता कौन है।
एक अरसा सा बीत गया
अपने आप से मिले हुए।
इस जहां में हमसफर
बन के मिलता ही कौन है।
उम्र भर रहे वो साथ
यह कोशिश बहुत की
सुबह से शाम तक
ढलता ही कौन है।
कुछ वो मिले जो
रास्ते में छूट गए
कंटीली राहों पे अब
चलता ही कौन है।
