STORYMIRROR

Rachna Vinod

Others

4  

Rachna Vinod

Others

ज़िन्दग़ी के मोड़

ज़िन्दग़ी के मोड़

1 min
313

जिसके आने से जागी जो आस

ज़िन्दगी में लगा कुछ तो है ख़ास

जिसके लिए दिल में यूं बरसा प्यार

जैसी बुझती हो अनबूझ प्यास।


मासूमियत भरा वो पल अभी भी याद

उंगली पकड़ने से थाम हाथों में हाथ

राहों पर संग संग चलते चलते

कितना दिलकश पाया जिसका साथ।


जिसके खिलते रूप में अपना रूप खिला

खिलती हंसी में अपनी हंसी खिला

इसी में जीने का मतलब जान

बढ़ते पलों में अपने सुर से सुर मिला।


कहीं पहुंचने की रेस में

पहुंच कर रुकने की रेस में

हमारा आपसी लगाव बना रहे

चलते-रुकते किसी भी रेस में।


खिले-खिले से महकते रहो

प्यारे-प्यारे से चहकते रहो

ज़िन्दगी के हर मोड़ पर

हमसे यूं ही मिलते रहो।


भरपूर जीवन में बने रहें ठाठ-बाट

अपनों का बना रहे साथ

यूं ही बढ़ते जीवन की रेस में शामिल

हमेशा रहो सुखी हमेशा कामयाब।

 



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन