हरियाली तीज
हरियाली तीज
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पार्वती का व्रत कहलाता,
गौरी तृतीया पड़ा है नाम।
पति कामना शिव की ले,
पार्वती ने किया व्रत काम।।
दिन भर निर्जल रहकर ही,
कठोर व्रत ये करती आई।
सुंदर पति कामना मन ले,
सुंदर देह अबला ने पाई।
पार्वती गई थी जब जंगल,
कठोर व्रत देख हरियाली।
हरितालिका नाम पड़ा तब,
रक्षक उनका शिव माली।।
सदियों से चला आ रहा,
महिलाओं में इसका नाम।
इस दिन व्रत करे गर नारी,
मिले सुंदर पति, पहुंचे धाम।।
जप व तप को करे इंगित,
जग का सुंदर पर्व सुंघाना।
दिन भर जल नहीं पीते हैं,
नहीं खाते इस दिन खाना।।
