STORYMIRROR

Durga Devi

Others

4  

Durga Devi

Others

गिरना

गिरना

1 min
238

कभी सोचा नहीं था,

कितना गिरेगा इंसान,

इतना कि नजरे ना मिला पाए,

आईने के सामने खुद से ।


क्यों उतारता वह कफन,

जो मिला समय आखिरी पर,

क्यों उन्हें समेट कर,

बिक्री करता बाजार में।


क्यों मर गई इंसानियत,

चंद कागज के टुकड़ों की खातिर,

बेच कफन लगा दिया कलंक,

पूरी मानव जाति पर।


क्या कोरोना का ऐसा भी,

उठाया जा सकता है फायदा,

 लूटपाट, चोरी, डकैती,

  पर आएगा इंसान ।


यक्ष प्रश्न उठता है,

सोचती हूँ बार-बार,

कब जिंदा होंगें इंसान,

कब बचेगी इंसानियत?



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन