STORYMIRROR

S Ram Verma

Others

3  

S Ram Verma

Others

एक बूंद हूँ !

एक बूंद हूँ !

1 min
308

एक अदना बूंद 

सी पहचान रखता हूँ

बाहर से शांत हूँ

मगर अंदर एक 

तूफान रखता हूँ

रख के तराजू में 

अपने प्यार की 

खुशियाँ दूसरे 

पलड़े में मैं अपनी 

जान रखता हूँ

किसी से क्या उस 

रब से भी कुछ नहीं 

माँगा अब तक मैंने  

मैं मुफलिसी में भी 

नवाबी शान रखता हूँ

मुर्दों की बस्ती में 

ज़मीर को ज़िंदा 

रख कर ए जिंदगी 

मैं तेरे उसूलों का 

मान रखता हूँ ! 


Rate this content
Log in