एक बूंद हूँ !
एक बूंद हूँ !
1 min
307
एक अदना बूंद
सी पहचान रखता हूँ
बाहर से शांत हूँ
मगर अंदर एक
तूफान रखता हूँ
रख के तराजू में
अपने प्यार की
खुशियाँ दूसरे
पलड़े में मैं अपनी
जान रखता हूँ
किसी से क्या उस
रब से भी कुछ नहीं
माँगा अब तक मैंने
मैं मुफलिसी में भी
नवाबी शान रखता हूँ
मुर्दों की बस्ती में
ज़मीर को ज़िंदा
रख कर ए जिंदगी
मैं तेरे उसूलों का
मान रखता हूँ !
