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V. Aaradhyaa

Children Stories Inspirational

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V. Aaradhyaa

Children Stories Inspirational

द्वेष , दर्प बचपन क्या जाने

द्वेष , दर्प बचपन क्या जाने

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कितनी प्यारी बातें बचपन की ,

सुलभ सरल बातें उनके मन की !


निश्छल सा होता है हर बालक ,

न रखता मन में कोई माया जालक !


द्वेष-दर्प को बचपन क्या जाने ,

नन्हा मन प्रेम भाव को ही पहचाने !


निश्छल सा जगता निश्छल ही सोता ,

नन्हा बचपन भूख लगे तो ही है रोता !


पर जैसे-जैसे वह बड़ा होता जाता है ,

धन का जुनून और स्वार्थ उर पे चढ़ता है !


स्वाद प्रभाव का ज्यों ही उसे मिलता है ,

उसका वाणी व्यवहार सब बदल सा जाता है !



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