STORYMIRROR

Vikrant Kumar

Others

5.0  

Vikrant Kumar

Others

चाय

चाय

1 min
237




उसके सुर्ख रंग का दीवाना हूँ मैं,

उसकी महक से मन में बवाल उठता है।

उसकी गरमाहट से मिलती है ताज़गी मुझको,

आँख खुलते ही उसका ख्याल उठता है।

उसकी बलखाती अदाओं का कायल हूँ,

थाम ना लूं तो मन में सवाल उठता है।

अधर होते है बेताब छूने को,

घूँट घूँट पीने का मन में विचार उठता है।

 इक चाय से है पटरी पे जीवन मेरा,

 ना मिले तो मन में भूचाल उठता है।



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन