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Anshika Awasthi

Children Stories Fantasy Children


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Anshika Awasthi

Children Stories Fantasy Children


बुलबुल

बुलबुल

1 min 251 1 min 251

ढलती शाम जैसे उठती हो किसी मोड़ पर 

ढलता सूरज जैसे उगता हो किसी छोर पर 

एक बना मुंडेरा छोटा सा 

छोटी सी उस एक डोर पर।


वो शाम सवेर आती है 

कुछ तिनके वहां बिछाती है 

वो डाल पर बैठी छोटी बुलबुल

गुनगुन गुनगुन कुछ गाती है।


है रैन बसेरा दो प्यारों का 

बुलबुल के नन्हे न्यारों का 

दो चंचल मुख नित हस्ते हैं

दो नन्हे डाल पर पलते हैं।


वो दाना प्रतिदिन लाती है 

और प्रेम से उन्हें खिलाती है 

एक डाल पर बैठे छोटी बुलबुल 

गुनगुन गुनगुन कुछ गाती है।।


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