STORYMIRROR

Savita Gupta

Others

3  

Savita Gupta

Others

बसंत का दर्पण

बसंत का दर्पण

1 min
264

अहा! बसंत का देखो पीत दर्पण...


ऋतुराज का पावन क़दम 

पुष्पगुच्छों के झूमते सरगम

नवल देह तरूवर पत्र पहन

तितलियों की चंचल तनमन

बगीया की देखो अद्भुत यौवन


अहा! बसंत का देखो पीत दर्पण...


अमिया की डाली गुँथी मंजरी

ख़ुशबू फैली मादक रसभरी

खेत सजी सजनी की पियरी

निहारती प्रकृति प्रेमी सुंदरी


अहा! बसंत का देखो पीत दर्पण...


गेंदा, सरसों के लहराते फूल

सींच लूँ मन को बसंत के रंग में 

सराबोर हो जाउँ बसंती बयार में

माँ शारदा के आगमन का दस्तक है

धरा ने देखो अद्भुत शृंगार किया है


अहा! बसंत का देखो पीत दर्पण...


मंद मंद हवाएँ, शोख़ फ़िज़ाएँ 

गुनगुना रही फाल्गुन के गीत

सुर्ख़ टेसू के फूल के रंग से

भीगे तन मन गोरी प्रेम से 


अहा! बसंत का देखो पीत दर्पण...


Rate this content
Log in