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Nivish kumar Singh

Others

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Nivish kumar Singh

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बेरोजगार युवा मांगे रोजगार।

बेरोजगार युवा मांगे रोजगार।

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पोथी पढ़-पढ़ पंडित भयो हम, 

रोजगार-रोजगार का जाप कर

बेरोजगार बैठे है हम। 


चल गई हमरी पूरी लक्ष्मी

रोजगार के पोथी खरीदने में, 

रिश्ते-नाते भी टूट गये अब

बेरोजगार हमरे होने से। 


अच्छा रोजगार पाबे खातिर, 

न धान का विड़ा रोपा, 

नाही कलम छोड़ कभी कुदाल चलाया। 

अब कैसे करे हम मजदूरी हो। 


रोजगार के लालच में, 

छोड़ा हमने अपना पल-पल का सुख। 

हमने लगा दिया अपना पुरा

दिन, महिना, और साल हो। 

रोजगार के पोथी पलट-पलट पढ़ने में। 


फिर भी हँसे अब पूरा समाज, 

हमरे पंडित हो बेरोजगार होने से। 

रोजगार दे रे मालिक, रोजगार दे, 

हमरे जिंदा रहे खातिर अब रोजगार दे। 


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