Read #1 book on Hinduism and enhance your understanding of ancient Indian history.
Read #1 book on Hinduism and enhance your understanding of ancient Indian history.

Nivish kumar Singh

Others


4  

Nivish kumar Singh

Others


मज़दूर दिवस

मज़दूर दिवस

1 min 270 1 min 270


जिन मजदूरों के वजह से मिल रहा आराम 

उन मजदूरों को हिन्द का आभार 

और दिल से प्रणाम


गाँव हो या शहर सबके काम आता मज़दूर

दुःख तो हैं इसका गहरा साथी 

पर ये मौज मर्जी चलता राही 

उठ भोर के नींदों से

पूरे दिन रहता परिवार से दूर

पिसता घिसता अपना पुरा लहू बहाता

कोई देश खुद को तभी तरक्की में गिनाता

सुबह से शाम फांक धूल मिट्टी गाता हैं

शाम को घर लौटते वक़्त

बदले में दो रोटी ही तो ले जाता है,, 


मजदूरों मे भी हैं एक बाल मज़दूर

उसकी दुविधा भी रोटी हैं.. 

काम पर रखना उसे हैं कानूनी जुर्म 

लेकिन उसे भूखे मर जाने देना

क्या कोई धर्म हैं? 


बड़े बड़े बैनर, पोस्टर, दीवारों पर

लिखते सब खुद को समाजसेवी

पता नहीं वो करते किस समाज़ की सेवा

जो बच्चे रहते कलम से वंचित

तपते धूप में बनाते ईंट

घिस घिसा हाथों से धोते प्लेट 

भड़ा हैं देश का अनाज़ गोदाम

फिर भी दो सुखी रोटी को भूखे मरते रहते,, 


बहा अपना लहू पसीना 

करते हम सब का काम आसान

मज़दूर छोड़े न कलम मजबूरी से

भूखे मरे न तरसते रोटी को

मिलकर कुछ करना होगा

इन्हें मज़दूरी का मोल नहीं

मिलकर जीने का हक देना होगा।


Rate this content
Log in