बेजान जिंदगी
बेजान जिंदगी
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अब ना रही जीने की ख्वाहिश
जर्रा जर्रा अलग हो चुका है
कहते थे जो तुम मुझसे बात
वो सब कुछ ख़त्म हो चुका है
नाम मात्र अब जोड़ के क्या
बेजान जिंदगी से कुछ कह जाओ।
क्या रह गया है प्रतारणा के सिवा
हो गई है अब तो पराकाष्ठा
हर कथन धूमिल लगता है
सोहबत भी बेगाना सा
क्या कहते हो अब बतलाओ
बेजान जिंदगी से कुछ कह जाओ।।
