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Dr Hoshiar Singh Yadav Writer

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Dr Hoshiar Singh Yadav Writer

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बढ़ती गर्मी

बढ़ती गर्मी

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सूरज की गर्मी बढ़ी, जलने लगे तरु पात,

पोखर तड़ाग सूख चले, हुये बुरे हालात।

बरखा रानी कब आएगी, करते हैं इंतजार,

काले बादल नभ पर छाये ,हो दिन की रात।।


एसी, कूलर, पंखे चले, नहीं मिलेगा चैन,

पसीने छूटे हर वक्त ही, चैन मिले नहीं रैन।

आइसक्रीम खाते सदा, खाते ककड़ी, तरबूज,

जमकर बारिश हो कभी, तन को मिले चैन।।


आग बरसता सावन जब, ढूंढे पेड़ की छांव,

शहरों में लुप्त वृक्ष, हरे भरे मिलते अब गांव।

अधिक पेड़ धरा पर होंगे, खिले धरा प्रकाश,

खुशी खुशी इस जग से हो, भवसागर से नाव।।


प्यासा पपीहा पुकारता, पिपाते जंगल के मोर,

गर्मी ने सताया जमकर, मचा है जमकर शोर।

जब छाते बादल नभ पर, मन में उठती उमंग,

रिमझिम बारिश जब होती, मन को करे विभोर।।


बढ़ती गर्मी परेशान करे, जन और जंगल जीव,

जब बारिश से हरे हो वन, मिट जाती तन पीर।

एक तरफ भीषण गर्मी, दूजे जमी उत्तर में बर्फ,

हर आपदा सहन करे जो, कहलाते देश के वीर।


शांत हो रहे पेड़ पौधे, झुलस गये हैं उनके पात,

गर्मी पड़ती दिन में भली, गर्म होती हैं तब रात।

पानी की कमी झलकती, मिलता नहीं कोई चैन,

बच्चे अकुलाते घरों में, बुरे बन जाते तब हालात।


तप रही है धरती मां, खरीफ फसल यूं उगाएंगे,

बाजरा, कपास, गुआर की खेती, धान भी लगाएंगे।

जमकर बारिश हो जाये, आ जायेगा मजा खूब,

धन धान्य भंडार भरे, तीज का पर्व हम मनाएंगे।


होगा सुहाना मौसम तो, पतंग उड़े तब आकाश,

गर्मी की छुट्टियां होंगी, बच्चों को आता है रास।

गर्मी सर्दी नजारे मौसम सहने पड़े हर जन जरूर,

बारिश में नहाते जमकर, नहीं रहे यूं बच्चे उदास।



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