STORYMIRROR

S.Dayal Singh

Others

2  

S.Dayal Singh

Others

*बड़ा दिल*

*बड़ा दिल*

1 min
20


है दिल बड़ा, रखते हम यार।

नंगी ईंटों पर खुले में,

सो जाते हम पाँव पसार।

इन ईंटों से तामीर होकर,

होगा जब मकान तैयार।


तंग दिल वाले बसेंगे उसमें, 

कर लेंगे सब बंद द्वार।

कुदरत के संग रहते-रहते,

सीख लिया हमने खुश रहना,

पर महलों में रहने वाले,

हमने देखे सदा ख्वार।


आबाद रहे ये महल चौबारे,

हम तो यही दुआ देंगे,

कल ऐसा ही ईंटों वाला,

बिस्तर कहीं बिछा लेंगे।

--एस.दयाल.सिंह-- 



Rate this content
Log in